Rajkumar Sachan hori
Raj Kumar Sachan Hori
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Raj Kumar Sachan Hori
मात्र शब्दों के खेल को कविता न मानने की उद्घोषणा करने वाले कवि श्री राजकुमार सचान होरी की कविताएँ हिन्दी में प्रचलित मुहावरों से कुछ अलग किस्म की हैं। कविता में श्रव्य की जगह यदि दृश्य का एहसास होने लगे तो मानना चाहिए कि कवि का बिम्बात्मक रूझान बहुआयामी है।

व्यंग्य और विडम्बना का एक नया भावाधार राजकुमार सचान होरी का अपना सृजनात्मक लहजा है। हिन्दी कविता धरा में इस नएपन का स्वागत हिन्दी कविता की नई प्रयोगधर्मिता का ही स्वागत है।
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Baba saheb charit manas


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